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बरेली में मस्जिद पर बुल्डोजर कार्रवाई को लेकर AIMIM का राष्ट्रपति को ज्ञापन, प्रशासन पर गंभीर आरोप

सै हैदर उस्मान : दैनिक विचार

आल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) बरेली इकाई ने आज महामहिम राष्ट्रपति के नाम एक ज्ञापन जिलाधिकारी बरेली के माध्यम से सौंपा। ज्ञापन में पार्टी पदाधिकारियों ने आरोप लगाया है कि बरेली जिले में मुस्लिम अल्पसंख्यक समाज के धार्मिक स्थलों के खिलाफ प्रशासन द्वारा एकतरफा और असंवैधानिक कार्रवाई की जा रही है।ज्ञापन के अनुसार, 7 फरवरी 2026 को गांव घंघोरा पिपरिया में जिला प्रशासन ने भारी पुलिस बल के साथ कथित रूप से बिना पूर्व सूचना के करीब 50 वर्ष पुरानी मस्जिद पर बुल्डोजर कार्रवाई की। AIMIM का दावा है कि संबंधित संपत्ति का मामला वर्तमान में माननीय हाईकोर्ट इलाहाबाद में द्वितीय अपील संख्या 463/2022 के तहत विचाराधीन है। पार्टी का कहना है कि मस्जिद कमेटी द्वारा संबंधित न्यायालयीन दस्तावेज दिखाने के बावजूद प्रशासन ने कार्रवाई की।ज्ञापन में उल्लेख किया गया है कि वर्ष 1996 में मूल वाद संख्या 73/94 (अल्लाह ताला बनाम बालक राम आदि) में मस्जिद के पक्ष में डिक्री पारित हुई थी। इसके अतिरिक्त, मूल वाद संख्या 130/1996 (चम्मन सिंह आदि बनाम मो. बक्श आदि) में भी वर्ष 2014 में मस्जिद के पक्ष में निर्णय दिया गया था। हालांकि, बाद में जिला न्यायालय में अपील के बाद मामला हाईकोर्ट में लंबित है।AIMIM ने आरोप लगाया कि जिला प्रशासन सुप्रीम कोर्ट और इलाहाबाद हाईकोर्ट की गाइडलाइंस का पालन नहीं कर रहा है तथा धार्मिक आधार पर भेदभावपूर्ण कार्रवाई की जा रही है। ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि जिले में कथित रूप से सरकारी भूमि पर बने अन्य धार्मिक स्थलों पर कोई कार्रवाई नहीं की गई है।पार्टी ने राष्ट्रपति से दो प्रमुख मांगें की हैं—हाईकोर्ट में अपील के अंतिम निस्तारण तक मुस्लिम समाज को संबंधित स्थल पर नमाज अदा करने की अनुमति दिलाई जाए।बिना न्यायालयीन दिशा-निर्देशों का पालन किए बुल्डोजर कार्रवाई करने वाले अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई के आदेश दिए जाएं।ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि गांव घंघोरा पिपरिया में लगभग 3500 से अधिक मुस्लिम आबादी निवास करती है और उक्त मस्जिद ही नमाज अदा करने का एकमात्र स्थान थी। पार्टी ने आगामी रमजान माह को देखते हुए धार्मिक स्वतंत्रता सुनिश्चित करने की मांग की है।

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