विवादित जमीनों पर निजी अस्पतालों का खेल

बरेली, उत्तर प्रदेश।बरेली शहर में निजी अस्पतालों का तेजी से हो रहा विस्तार अब गंभीर सवालों के घेरे में है। थाना बारादरी क्षेत्र में संचालित कई निजी अस्पताल ऐसे हैं, जिनकी जमीन पर मालिकाना हक को लेकर वर्षों से विवाद चल रहा है। इसके बावजूद न सिर्फ वहां निर्माण हुआ, बल्कि बरेली विकास प्राधिकरण (BDA) से नक्शा पास कराकर अस्पतालों का पंजीकरण तक हासिल कर लिया गया।सूत्रों के अनुसार, इन जमीनों को लेकर दो पक्षों के बीच अदालत में मुकदमे लंबित हैं। एक पक्ष जमीन को अपनी बता रहा है, जबकि दूसरे पक्ष ने कथित रूप से कब्जा कर निर्माण शुरू कर दिया। हैरानी की बात यह है कि जमीन विवादित होने के बावजूद भवनों के नक्शे स्वीकृत हो गए और अस्पताल धड़ल्ले से संचालित हो रहे हैं।बारादरी थाना क्षेत्र बरेली के सबसे व्यस्त और महंगे इलाकों में गिना जाता है, जहां जमीन की कीमतें आसमान छू रही हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जब तक जमीन का मालिकाना हक स्पष्ट न हो, तब तक बीडीए द्वारा नक्शा पास किया जाना कानूनन संभव नहीं है। ऐसे में सवाल उठता है कि नियमों को ताक पर रखकर यह सब कैसे हुआ?जानकारों का मानना है कि इन मामलों में प्रभावशाली लोगों की भूमिका और प्रशासनिक सांठगांठ से इनकार नहीं किया जा सकता। बरेली में पहले भी भूमाफियाओं से जुड़े कई मामलों का खुलासा हो चुका है। हाल ही में बारादरी थाने के इंस्पेक्टर सहित कई पुलिसकर्मियों को भूमाफियाओं से साठगांठ के आरोप में निलंबित किया जा चुका है, जिससे इस पूरे प्रकरण की गंभीरता और बढ़ जाती है।अब सवाल यह भी उठ रहा है कि यदि जमीन विवादित है, तो अस्पताल का पंजीकरण कैसे हुआ? वहां इलाज करा रहे मरीजों की सुरक्षा और कानूनी मानकों का क्या? क्या मुख्य चिकित्सा अधिकारी और विकास प्राधिकरण ने जांच के बिना ही अनुमति दे दी?इस पूरे मामले पर मुख्य चिकित्सा अधिकारी और बीडीए अधिकारियों से जवाब मांगा गया है, लेकिन खबर लिखे जाने तक किसी की ओर से कोई स्पष्ट प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
