
सै.हैदर उस्मान
बरेली। देश की उन्नत स्वास्थ्य व्यवस्था की ज़रूरतों को नजदीक से समझने के बाद बरेली में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) की मांग एक बार फिर तेज़ हो गई है। हाल ही में दिल्ली स्थित एम्स का दौरा कर वहां की विश्वस्तरीय चिकित्सा सुविधाओं को देखने के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि एम्स जैसे संस्थान हर बड़े क्षेत्र की अनिवार्य आवश्यकता बन चुके हैं।दिल्ली एम्स देश की चिकित्सा व्यवस्था का शीर्ष संस्थान माना जाता है, जहां देश के हर कोने से मरीज इलाज की उम्मीद लेकर पहुंचते हैं। लेकिन अत्यधिक भीड़, लंबी कतारें, परेशान मरीज और उनके परिजन यह दर्शाते हैं कि एक या दो एम्स देश की विशाल आबादी के लिए पर्याप्त नहीं हैं। यह स्थिति स्वास्थ्य सेवाओं के विकेंद्रीकरण की आवश्यकता को उजागर करती है।इस मुद्दे पर समाजवादी पार्टी के पूर्व प्रवक्ता मयंक शुक्ला ने कहा कि बरेली में एम्स की मांग वर्षों पुरानी है, लेकिन अब इसकी आवश्यकता और भी अधिक स्पष्ट हो चुकी है। उन्होंने बताया कि बरेली भौगोलिक दृष्टि से उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के कुमाऊँ क्षेत्र के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु है।यदि बरेली में एम्स जैसी अत्याधुनिक चिकित्सा संस्था की स्थापना होती है, तो बरेली मंडल के साथ-साथ पीलीभीत, शाहजहाँपुर, बदायूँ और उत्तराखंड के नैनीताल, हल्द्वानी जैसे क्षेत्रों के लाखों लोगों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।वर्तमान में गंभीर मरीजों को इलाज के लिए दिल्ली या लखनऊ तक जाना पड़ता है, जिससे समय, धन और स्वास्थ्य — तीनों पर भारी असर पड़ता है। ऐसे में बरेली में एम्स की स्थापना आम जनता के लिए बड़ी राहत साबित होगी। यह न केवल स्वास्थ्य सेवाओं को सुलभ बनाएगी, बल्कि चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा करेगी।समाजवादी पार्टी के पूर्व प्रवक्ता मयंक शुक्ला ने कहा कि बरेली एम्स का मुद्दा केवल एक शहर की मांग नहीं, बल्कि जनहित से जुड़ा हुआ प्रश्न है। दिल्ली एम्स पर बढ़ते दबाव और मरीजों की पीड़ा को देखते हुए अब समय आ गया है कि केंद्र सरकार इस दिशा में ठोस और निर्णायक कदम उठाए।ताकि स्वास्थ्य सेवा किसी विशेष वर्ग का विशेषाधिकार न रहकर हर नागरिक का अधिकार बन सके।
