
सै. हैदर उस्मान
बरेली। इंटेलेक्चुअल सोशल वेलफेयर एसोसिएशन (इसबा) द्वारा समाज हित में लगातार किए जा रहे कार्यों ने संस्था को एक अलग पहचान दिलाई है। चाहे आपदा राहत हो या जरूरतमंद परिवारों की सहायता, इसबा हर मोर्चे पर सक्रिय भूमिका निभाता रहा है।कुछ समय पूर्व पीलीभीत में आई भीषण बाढ़ के दौरान इसबा ने मानवीय संवेदना दिखाते हुए लगभग 600 परिवारों को राहत किट भेजकर मदद पहुंचाई थी। वहीं बरेली के ठिरिया निवासी एक कबाब कारोबारी की आकस्मिक मौत के बाद उसके परिवार को आर्थिक सहायता दी गई और उसके बच्चों की शिक्षा व परवरिश का पूरा खर्च उठाने की जिम्मेदारी भी इसबा ने ली।संस्था के अंतर्गत ‘जकात’ नाम से एक विशेष गठन किया गया है, जिसके माध्यम से गरीब और जरूरतमंद परिवारों को नियमित रूप से सहायता प्रदान की जाती है। इसबा द्वारा किए गए ऐसे अनेक कार्य समाज में सराहे जा रहे हैं।हालांकि हाल के दिनों में कुछ लोगों द्वारा यह आरोप लगाए जा रहे थे कि इस संगठन में केवल किसी विशेष समुदाय के लोग शामिल हैं और सरकारी डॉक्टर भी इससे जुड़े हुए हैं, जो नियमों के खिलाफ है। संस्था से जुड़े लोगों का कहना है कि ये आरोप निराधार और भ्रामक हैं।इसबा एक सर्वसमाज की संस्था है, जिसमें विभिन्न वर्गों और समुदायों के लोग जुड़े हुए हैं। संस्था से डॉ. अतुल अग्रवाल (एनेस्थीसिया विशेषज्ञ), डॉ. रामवीर सिंह सहित कई सम्मानित चिकित्सक और समाजसेवी सदस्य के रूप में जुड़े हैं।जानकारों के अनुसार, स्वास्थ्य विभाग का कोई भी अधिकारी या सरकारी डॉक्टर किसी गैर-सरकारी संगठन (NGO) से जुड़ सकता है, बशर्ते इसके लिए विभाग से पूर्व अनुमति ली गई हो और यह सुनिश्चित किया गया हो कि इससे उनके सरकारी कर्तव्यों में कोई बाधा न आए तथा किसी प्रकार का हितों का टकराव (Conflict of Interest) न हो। नियमों के तहत यह प्रक्रिया पूरी तरह वैध है।इसबा से जुड़े पदाधिकारियों का कहना है कि संस्था पारदर्शिता और नियमों के तहत कार्य करती है और समाज सेवा ही इसका एकमात्र उद्देश्य है। लगातार लगाए जा रहे आरोप संस्था की छवि धूमिल करने का प्रयास मात्र हैं, जिनका हकीकत से कोई लेना-देना नहीं है।
