
सै.हैदर उस्मान
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के पूर्व पुलिस महानिदेशक (DGP) प्रशांत कुमार को योगी आदित्यनाथ सरकार ने एक अहम प्रशासनिक जिम्मेदारी सौंपी है। रिटायरमेंट के करीब छह महीने बाद उन्हें उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया गया है। उनके कार्यकाल की अवधि तीन वर्ष होगी।यह वही आयोग है जिसके माध्यम से प्रदेश में माध्यमिक और उच्च शिक्षा के शिक्षकों की भर्तियां की जाती हैं। प्रशांत कुमार की नियुक्ति से लंबे समय से रुकी शिक्षक भर्तियों को दोबारा गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।एकीकृत आयोग की कमानगौरतलब है कि वर्ष 2024 में योगी सरकार ने उच्च शिक्षा सेवा चयन आयोग और माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन आयोग का विलय कर एकीकृत यूपी शिक्षा सेवा चयन आयोग का गठन किया था। इस आयोग की पहली अध्यक्ष प्रोफेसर कीर्ति पांडेय थीं, जिन्होंने हाल ही में अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। उनके इस्तीफे के बाद आयोग का कामकाज लगभग ठप हो गया था।अब प्रशांत कुमार की नियुक्ति को आयोग के लिए नई शुरुआत के तौर पर देखा जा रहा है। प्रशासनिक अनुभव और सख्त कार्यशैली के लिए पहचाने जाने वाले प्रशांत कुमार से सरकार को उम्मीद है कि वे भर्ती प्रक्रिया को पारदर्शी, तेज और प्रभावी बनाएंगे।भर्तियों को मिलेगी रफ्तारप्रदेश में लंबे समय से शिक्षक भर्ती का इंतजार कर रहे लाखों अभ्यर्थियों के लिए यह नियुक्ति राहत की खबर मानी जा रही है। माना जा रहा है कि नए अध्यक्ष के कार्यभार संभालते ही अटकी हुई भर्तियों और प्रक्रियाओं को प्राथमिकता के आधार पर आगे बढ़ाया जाएगा।
